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रघुनाथ कीर्ति में छात्रावास के लिए कठोर नियम

रघुनाथ कीर्ति में छात्रावास के लिए कठोर नियम

देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में इस बार अनेक नये नियम बनाये जा रहे हैं। छात्रावास इस बार उन्हीं छात्रों को दिया जाएगा, जो पूरी तरह से नियमों का पालन कर पाएंगे। इसके लिए छात्रों को हॉस्टल के लिए आवेदन करते समय शर्त पत्र भरना होगा।

श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाओं के बाद इन दिनों छात्रों का ग्रीष्म अवकाश चल रहा है। 16 जून को नया सत्र आरंभ होने जा रहा है। इस दिन से छात्रों का नयी कक्षाओं में प्रवेश आरंभ होने के कारण परिसर में अध्ययन-अध्यापन शुरू हो जाएगा। इसके दृष्टिगत छात्रों को छात्रावास के लिए आवेदन करने को कहा जा रहा है। परिसर के कुल आठ भवन हैं, जिनमें छात्रावास संचालित किया जाता है। इस शिक्षण सत्र में छात्रावास में संख्या 480 थी। इस बाद यह संख्या लगभग 550 हो सकती है। छात्रावास की क्षमता 570 के लगभग है। परिसर प्रशासन ने इस बार निर्णय लिया है कि उन्हीं छात्रों को हॉस्टल सुविधा दी जाएगी, जो छात्रावास नियमों को पूरी तरह पालन कर पाएंगे। इसके लिए छात्रों को प्रवेश के समय नियमों से अवगत कराकर उनसे शर्त पत्र भरवाया जाएगा। छात्रावास में दिनचर्या प्रातः 4.30 बजे आरंभ हो जाएगी। रात 9 बजे छात्रों से मोबाइल लेकर जमा कर सुबह आठ बजे दिये जाएंगे। उन्हें निर्धारित परिधान और कठोर अनुशासन में रहना होगा तथा परिसर के विभिन्न कार्यक्रमों में पूरी भागीदारी करनी होगी। इसके अतिरिक्त भी अन्य कई नियम निर्मित किये गये हैं।

परिसर निदेशक प्रो0 पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि परिसर को विशिष्ट शास्त्र अध्ययन केंद्र बनाया जा रहा है। इसलिए अनेक नये नियम निर्धारित किये गये हैं। अध्यापक-अध्यापिकाओं की वेशभूषा निर्धारित की गई है। अध्यापकों को धोती या पजामा-कुर्ता तथा अध्यापिकाओं को सलवार-कमीज अथवा साड़ी में रहना होगा। साप्ताहिक अवकाश अब शनिवार-रविवार को न होकर प्रतिपदा, अष्टमी, अमावस्या तथा पूर्णिमा को होंगे।

प्रो0 सुब्रह्मण्यम ने बताया कि इन दिनों छात्रावासों की मरम्मत करवाई जा रही है। छात्रावास में रहने के लिए छात्रों का चयन मेरिट, दूरी, अनुशासन इत्यादि के आधार पर किया जाएगा। परिसर के 20 किलोमीटर की दायरे में रहने वाले छात्रों को छात्रावास नहीं दिया जाएगा। परिसर में संस्कृतनिष्ठ वातावरण बनाने के दृष्टिगत प्रत्येक छात्र को संस्कृत में ही अनिवार्य रूप से व्यवहार करना होगा।

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