उत्तराखंड

रघुनाथ कीर्ति ने दस स्पर्धाओं में बाजी मारी,शिक्षण संस्थानों से बाहर जीवन में भी हों स्वस्थ स्पर्धाएं: कंचन

रघुनाथ कीर्ति ने दस स्पर्धाओं में बाजी मारी,शिक्षण संस्थानों से बाहर जीवन में भी हों स्वस्थ स्पर्धाएं: कंचन

देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में आयोजित उत्तराखंड राज्यस्तरीय शास्त्रीय स्पर्धाओं का समापन हो गया। इनमें श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर न्याय, वेदभाष्यभाषण, आयुर्वेद भाषण, ज्योतिष, ज्योतिष शलाका, धर्मशास्त्र, साहित्य शलाका, शास्त्रस्फूर्ति आदि दस स्पर्धाओं में प्रथम रहा।

समापन अवसर पर मुख्य अतिथि निदेशक प्रभारी संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड, कंचन देवराड़ी ने कहा कि बच्चों में स्वस्थ प्रतियोगिताओं का भाव केवल शिक्षण संस्थान स्तर तक ही नहीं, जीवन पर्यंत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत का ज्ञान और स्पर्धाएं पुस्तकों और शिक्षण संस्थानों से बाहर भौतिक जगत में आनी आवश्यक हैं। ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। इसे जीवनपर्यंत अर्जित किया जा सकता है। ज्ञान के स्रोत में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। अपने से छोटा या अपने से अनेक प्रकार से भिन्न व्यक्ति से भी ज्ञान लेने में कोई हर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को अनेक कठिनाइयों और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है। आज के डिजिटल युग में ज्ञानार्जन के स्रोत परिवर्तित हुए हैं, परंतु पुस्तकों का महत्त्व ज्ञान देने के क्षेत्र में युगों-युगों तक फिर भी रहेगा। विशिष्ट अतिथि दयालबाग शिक्षण संस्थान की प्रोफेसर अनीता ने कहा कि संस्कृत के लोगों के प्रति आम तौर पर यह धारणा रही है कि वे परंपरावादी और कठोर सैद्धांतिक होते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। संस्कृत के लोगों ने अब बता दिया है कि वे जमाने के साथ कदम मिलाकर चलने में सक्षम हैं। आज भारतीय ज्ञान परंपरा के इस क्रांतिकारी दौर में लोगों को संस्कृत का महत्त्व और हमारे शास्त्रों की भूमिका समझ में आने लगी है। उन्होंने कहा कि समय के साथ परिवर्तन आवश्यक है और संस्कृत की दुनिया के लोगों ने इस सिद्धांत को अपना लिया है। अध्यक्षीय उद्बोधन में परिसर निदेशक प्रो0 पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि शास्त्रों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अहम भूमिका निभा रहा है। राज्यस्तरीय स्पर्धाओं के कारण राज्य के शिक्षण संस्थानों में प्रतियोगिताओं को लेकर जागरूकता और रुचि उत्पन्न हुई है। पिछले साल 25 शास्त्रीय स्पर्धाएं हुई थीं, इस साल इनकी संख्या 31 तक पहुंच गई है। हमारे परिसर ने उत्तराखंड के 158 संस्कृत शिक्षण संस्थानों को स्पर्धाओं में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया था। इस बार विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 110 बच्चों ने स्पर्धाओं में हिस्सा लिया है।

सारस्वत अतिथि प्रो0 महेश झा ने कहा कि बच्चों ने जिस प्रकार गंभीरता और परिश्रम से स्पर्धाओं में भाग लिया, वह सराहनीय है। संयोजक ब्रह्मानंद मिश्रा ने बताया कि प्रतियोगिताओं के पारदर्शी आयोजन के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बलाहर परिसर, दयालबाग शिक्षणसंस्थान आगरा आदि स्थानों ने शास्त्र विशेषज्ञ निर्णायक के रूप में आमंत्रित किये गये थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 जनार्दन सुवेदी ने किया।

इस अवसर पर डाॅ0 सुरेश शर्मा, डाॅ0 सुधांशु वर्मा, अंकुर वत्स, डाॅ0 रितेशा, डाॅ. मनीषा आर्या,डाॅ0 दुर्गाशरण रथ, डाॅ0 रवींद्र उनियाल, डाॅ0 अरविंद सिंह गौर, रजत गौतम छेत्री, डाॅ0 अमंद मिश्र, डाॅ0 सोमेश बहुगुणा, डाॅ0 रश्मिता आदि उपस्थित थे।

प्रतियोगिताओं में अष्टाध्यायी कंठपाठ में श्रीमद्दयानंदआर्षज्योतिगुरुकुलम् पौंधा, देहरादून के आरव सारस्वत प्रथम, दिव्यांजलि भारती द्वितीय और गुंटी ऋतजा तृतीय रहीं। अमरकोश कंठ पाठ में भी पौंधा के सक्षम आर्य प्रथम बौर शुभम द्वितीय रहे। उपनिषद कंठपाठ में वरेण्या त्यागी प्रथम, अक्षय द्वितीय और हर्षित सैनी तृतीय रहे। काव्यकंठ पाठ में पतंजलि गुरुकुलम्, मुल्यागांव की निशा नेगी प्रथम और कृष्ण पांडेय द्वितीय रहे। रामायणकंठ पाठ में पतंजलि की जाह्नवी प्रथम रहीं। दर्शनसूत्र कंठ पाठ में पतंजलि विश्वविद्याल की खुशी पूर्वे प्रथम, साहिल द्वितीय और प्रांजल तृतीय रहे। भगवद्गीता कंठपाठ में स्वामी दर्शनानंद गुरुकुलम् के हितेश प्रथम,अंशिता द्वितीय और गीतांजलि तृतीय रहे। सुभाषितकंठ पाठ में सुयश मिश्र प्रथम लक्ष्य द्वितीय और रिद्धिमा तृतीय राणा रहीं। धातुरूप कंठ पाठ में पतंजलि गुरुकुलम् की हर्षिता चैबे प्रथम और श्रेया द्वितीय रहे। शास्त्रस्फूर्ति स्पर्धा में भास्कर गण (रघुनाथ कीर्ति) के मोनिका, लोकेशचंद्र प्रथम, पतंजलि गण के मल्लिकादास और हर्षिता चैबे द्वितीय तथा गौतम गण के सिया और प्रीति तृतीय रहे।

व्याकरण भाषण में श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के केशव प्रसाद गौर प्रथम, सुमेधा द्वितीय और कमलकिशोर तृतीय रहे। ज्योतिष भाषण में रघुनाथ कीर्ति की मोनिका प्रथम रहीं। धर्मशास्त्र भाषण में रघुनाथ कीर्ति के अभिषेक गौड़ प्रथम और ब्रह्चारिणी मल्लिकादास द्वितीय रहीं। साहित्यभाषण में पतंजलि गुरुकुलम हरिद्वार की प्रतिभा प्रथम, आयुर्वेद में रघुनाथ कीर्ति के

हरिकृष्ण आर प्रथम और गगन सैनी द्वितीय रहे। न्यायभाषण में रघुनाथ कीर्ति की श्रुति शर्मा प्रथम, वेदांत में भगवानदास के ज्ञानेंद्र सिंह प्रथम और मुस्कान द्वितीय, वेदभाष्यभाषण में रघुनाथ कीर्ति के हिमांशु पांडेय प्रथम, सांख्ययोग में पतंजलि विश्वविद्यालय की शुभांगिनी आर्या प्रथम, कीर्ति द्वितीय, भारतीय विज्ञान भाषण में पतंजलि मुल्यागांव की खुशी कुमारी प्रथम, अक्षरश्लोकी में पौंधा के रितेश पांडेय प्रथम अंशुल द्वितीय और अक्षय तृतीय रहे। व्याकरण शलाका में रघुनाथ कीर्ति के लोकेश चंद्र बड़सिलिया प्रथम, ज्योतिष शलाका में रघुनाथ कीर्ति के मुकुल प्रजापत प्रथम साहित्य शलाका में रघुनाथ कीर्ति के मयंक तिवारी प्रथम, ब्रह्मचारिणी संध्या द्वितीय रहीं। काव्य शलाका में पतंजलि मुल्यागांव की ब्रह्चारिणी प्रिया प्रथम, दीपांक्षी द्वितीय और ब्रह्मचारिणी अपूर्वा तृतीय रहीं। भारतीय गणित शलाका में रघुनाथ कीर्ति के लोकेश प्रथम और ब्रह्मचारिणी सिद्धि द्वितीय, पुराणेतिहास शलाका में पतंजलि मुल्यागांव की हर्षिता राठी प्रथम, अखिल कुमार द्वितीय और साक्षी तृतीय रहे।

निर्णायकों में प्रो.अनीता, डॉ दिनेश चंद्र पांडेय, डॉ रघु बी राज, डॉ वैथी सुब्रह्मण्यम आदि शामिल थे।

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