छात्रों ने दिखाई लघु भारत झलक,मातृभाषा दिवस पर रघुनाथ कीर्ति में काव्य, लोकगीत और भाषण स्पर्धाएं
छात्रों ने दिखाई लघु भारत झलक,मातृभाषा दिवस पर रघुनाथ कीर्ति में काव्य, लोकगीत और भाषण स्पर्धाएं
राजशेखर, रत्नदीप और सुशील राजपूत ने किया प्रथम स्थानों पर कब्जा
देवप्रयाग। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में मातृभाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों ने लघुभारत की थीम पर विभिन्न प्रदेशों की मातृभाषाओं में प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर आयोजित तीन प्रकार की स्पर्धाओं में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थानों पर रहे विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार दिये गये।

मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में परिसर में छात्रों ने काव्यपाठ किया, लोकगीतों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं तथा अपनी मातृभाषाओं की वर्तमान स्थिति पर विचार व्यक्त किये। छात्रकेंद्रित इस कार्यक्रम में छात्रों ने कहा कि मातृभाषाओं का संरक्षण अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। भारतीय भाषाओं-हिंदी, संस्कृत इत्यादि का वर्चस्व और मजबूती इन मातृभाषाओं पर निर्भर है। हिमांशु भट्ट, वर्षा नेगी, मनीष शर्मा, मोनिका, मुकुल, राजशेखर विभूति, ममता सुयाल, सुशांत पोखरेल, ऋतिका पाल, हरिकृष्ण, मेघा, सिमरन आदि ने गढ़वाली, कुमाउंनी, राजस्थानी, नेपाली, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, मगही, बिहारी, हिमाचली आदि भाषाओं की महत्ता बताई और कहा कि हमें अपनी मातृभाषाओं में बात करने में गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। परिसर निदेशक प्रो0 पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि मातृभाषाओं को मां की तरह ही सम्मान दिया जाना चाहिए। जन्म के बाद इस दुनिया में सबसे पहले हमारा संपर्क मां से होता है और मां से ही हमें पहले शब्द सुनने को मिलते हैं, ये शब्द मातृभाषा के होते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य का स्वभाव है कि वह अपनी सहज और स्पष्ट अभिव्यक्ति अपनी मातृभाषा में ही कर पाता है। अपनी मातृभाषा का सम्मान करें, परंतु अन्य मातृभाषाओं की निंदा और अपमान भी न करें।
इस अवसर पर आयोजित आशुभाषण स्पर्धा में राजशेखर विभूति प्रथम, प्रतीक्षा पाण्डे द्वितीय तथा मनीष शर्मा तृतीय रहे। काव्यपाठ में रत्नदीप शुक्ला प्रथम, ममता सुयाल द्वितीय तथा सुशांत पोखरेल तृतीय रहे। लोकसंगीत स्पर्धा में सुशील राजपूत प्रथम, आयुष द्वितीय तथा शिवानी सती तृतीय रही। प्रथम स्थान पर रहे छात्रों को एक हजार, द्वितीय को सात सौ और तृतीय स्थान पर रहे छात्रों को पांच सौ रुपये के नगद पुरस्कार दिये गये। स्पर्धाओं में सचिन,निर्मला, विकल, विशाल भारद्वाज, दिगंबर रतूड़ी, मधुसूदन उप्रेती, प्रभात देवी शर्मा, आदित्य शर्मा, सचिन पांडेय आदि ने भी भाग लिया। निर्णायक की भूमिका में हिंदी प्राध्यापक और जनसंपर्क अधिकारी डॉ0 वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल रहे। कार्यक्रम का संचालन ज्योतिष प्राध्यापक रजत गौतम छेत्री ने किया।
