उत्तराखंड

हिंदी में ही होती है संपूर्ण अभिव्यक्ति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, देवप्रयाग में हिंदी माह का आरंभ 

हिंदी में ही होती है संपूर्ण अभिव्यक्ति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, देवप्रयाग में हिंदी माह का आरंभ 

देवप्रयाग। हिंदी एक भाषा ही नहीं, हमारे स्वाभिमान, राष्ट्रीय भावना और अपनत्व का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। हम अन्य भाषाओं को भले ही अपना लें, लेकिन सच यह है कि हमारी संपूर्ण अभिव्यक्ति इसी भाषा में होती है।

यह बात केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में आयोजित हिंदी माह के शुभारंभ अवसर पर कही गई।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ आचार्य डॉ शैलेन्द्र नारायण कोटियाल ने कहा कि श्री राम भगवान पर वाल्मीकि रामायण के बाद सबसे बड़ा शास्त्र रामचरितमानस के रूप में तुलसीदास जी ने दिया है। रीतिकाल के कवियों ने संस्कृत साहित्य परंपरा को नए रूप में आगे बढ़ने का काम किया है क्योंकि उन्होंने रस, अलंकार, छंद इत्यादि को ग्रंथद्ध किया है। भले ही वह हिंदी में क्यों न हो। भारतेंदु और द्विवेदी जी ने खड़ी बोली को परिष्कृत करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। यही हिंदी आज की साहित्यिक हिंदी है।

विशिष्ट वक्ता ज्योतिष विभाग के समन्वयक डॉ ब्रह्मानंद मिश्रा ने कहा कि चार कालों में विभाजित हिंदी साहित्य के लगभग 1600 वर्षों के इतिहास में हर युग की अपनी विशिष्टता और उपलब्धि रही है। हिंदी ने हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रेमचंद, हरिश्चंद्र,प्रताप नारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट जैसे लेखकों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध शब्दों की जबरदस्त लड़ाई लड़ी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा और भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन सराहनीय है।

कार्यक्रम संयोजक डॉ वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने कहा कि नए छोड़ो के परिणाम के अनुसार हिंदी आज विश्व की नंबर एक भाषा बन गई है। उसने चीनी भाषा और अंग्रेजी को भी पीछे छोड़ दिया है। यह हिंदी भाषण के लिए गौरव की बात है। पायल पाठक ने हिंदी दिवस के कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रोपीबी सुब्रमण्यम ने कहा हिंदी अपनाते समय हमें हिंदी की शुद्धता का भी ध्यान रखना होगा। वरना आने वाले 20 वर्षों में हिंदी अपना स्वरूप पूरी तरह खो देगी। उन्होंने कहा कि हिंदी में अन्य भाषाओं को अपने साथ ले चलने की अद्भुत क्षमता और शक्ति है परंतु हमें यह भी ध्यान रखना है कि तत्सम शब्दों का ही अधिकांशित: उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से हिन्दी पखवाड़ा नहीं, परिसर में हिंदी माह मनाया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन नितिन सती स्वागत भाषण शैलेंद्र भट्ट और धन्यवाद ज्ञापन कशिश ने किया। इस मौके पर डॉ अनिल कुमार, डॉ अरविंद सिंह गौर, डॉ शैलेन्द्र उनियाल, डॉ सोमेश बहुगुणा, डॉ मनीषा आर्या, डॉ सुमिति सैनी आदि उपस्थित थे।

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