उत्तराखंड

चार दिन से सड़क ठप, बिना बिजली-पानी के रहे ग्रामीण, कीर्तिनगर के अंतिम गांव टोला की सड़क बंद, विद्यालय भवन खतरे में 

चार दिन से सड़क ठप, बिना बिजली-पानी के रहे ग्रामीण, कीर्तिनगर के अंतिम गांव टोला की सड़क बंद, विद्यालय भवन खतरे में 

देवप्रयाग। कीर्तिनगर विकासखंड के दूरस्थ गांव टोला का चार दिन से सड़क संपर्क टूटा हुआ है। बिजली की लाइन भी क्षतिग्रस्त थी,जिसे अब ठीक करने की कार्रवाई की गई। गांव में पंपिंग योजना होने के कारण बिजली के अभाव में पानी की आपूर्ति भी ठप रही। सड़क खुलने की उम्मीद फिलहाल न के बराबर है।

देवप्रयाग विधानसभा सभा क्षेत्र की डागर पट्टी के अंतिम गांव टोला में इसी साल जनवरी में सड़क पहुंची थी। अभी पहले चरण का ही कार्य हुआ है, इसलिए हल्की सी बरसात में भी मलबा,पत्थर और पेड़ सड़क पर आ जाते हैं। गांव के लोग छोटे-मोटे मलबे को स्वयं ही श्रमदान से हटा देते हैं। कुछ दिन पहले हुई भारी बारिश से ग्वाड़ गांव के प्राथमिक विद्यालय के पुश्ते का बड़ा हिस्सा सड़क पर आ गया। साथ ही माथ्याग्वाड़ और भैरसैंण नामक स्थानों पर भी सड़क बाधित हो गई।

स्कूल का पुश्ता टूटने से दोहरी समस्या हो गई है। स्कूल भवन के लिए तो खतरा हो ही गया,स्कूल के नीचे के घरों के लिए भी खतरा उत्पन्न हो गया है। उक्त भवन स्वामी कमलसिंह ने बताया कि जब से उक्त पुश्ता टूटा,हम जागकर रातें बिता रहे हैं। विभाग को हम दो-तीन परिवारों की सुरक्षा के दृष्टिगत उक्त पुश्ता शीघ्र बनवाना होगा।

वहीं, विद्यालय भवन के पास आया मलबा विभाग के लिए चुनौती बन गया है। यदि मलबे को हटाते हैं तो पूरा पुश्ता टूटकर विद्यालय भवन को भी ध्वस्त कर सकता है। ऐसे में विभाग तरकीब निकाल रहा है कि कैसे पहले सड़क खोली जाए। टोला गांव के विजयपाल सिंह इत्यादि ग्रामीणों ने बताया कि तीन जगह सड़क बाधित होने के कारण लोगों को जरूरी कार्य के लिए भारी बारिश में लंबी पैदल दूरी नापकर गाड़ी तक ग्वाड़ गांव में पहुंचना पड़ रहा है। ऊपर से पत्थर गिरने और बाघ का भय अलग से है। उन्होंने बताया कि तीन-चार दिन पहले बारिश से टोला गांव की बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, इसलिए पंप न चल पाने के कारण पानी की आपूर्ति भी बाधित रही। पूरा गांव इतने दिन अंधेरे में रहा। उन्होंने मांग की कि गांव की बाधित सड़क तुरंत खोली जाए।

इस संबंध में बिजली विभाग की एसडीओ प्रियंका नेगी का कहना है कि बिजली की लाइन ठीक करने के लिए कर्मचारियों की टीम जा चुकी है। शीघ्र ही विद्युत आपूर्ति बहाल हो जाएगी।

दूसरी ओर, लोकनिर्माण विभाग के अवर अभियंता नदीम ने बताया कि विभाग मशीन भेजकर बाधित सड़क को खुलवाना चहता था, परंतु गांव के कुछ लोगों ने कहा कि पहले पुश्ता बनाएं,उसके बाद सड़क खोलें, क्योंकि सड़क की खुदाई में पूरा पुश्ता नीचे आ सकता है।

श्री नदीम का कहना है कि हमारी प्राथमिकता पहले सड़क खोलने की है। इसके बाद पुश्ता लगेगा, क्योंकि उसके लिए एक निश्चित प्रक्रिया और औपचारिकता पूरी करनी होती है।

स्थानीय ठेकेदारों से न कराएं कार्य

गांव के कुछ लोगों ने आक्रोश जताया कि स्थानीय ठेकेदारों के कारण सड़क और पुश्तों का निर्माण की गुणवत्ता घंटिया होती है। लिहाज और भाई-बंदी के कारण उनसे खुलकर बोला भी नहीं जाता। इसलिए स्थानीय ठेकेदारों से गांव का सड़क का कोई कार्य नहीं कराया जाना चाहिए। नाम न छापने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने कहा कि गांव की सड़क सारा कार्य बाहर के ठेकेदारों से ही कराया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *