Thursday, July 23, 2026
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काम बोलता है, निदेशक सुब्रह्मण्यम को मिला कार्यकाल विस्तार

काम बोलता है, निदेशक सुब्रह्मण्यम को मिला कार्यकाल विस्तार

देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम के कार्यकाल को तीन साल के लिए विस्तार दे दिया गया है। माना जा रहा है कि उनके कार्यकाल में परिसर में हुए विकास, बेहतरीन अध्ययन-अध्यापन के वातावरण तथा चुस्त-दुरुस्त प्रशासनिक व्यवस्था के दृष्टिगत विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। इस निर्णय पर परिसर में प्रसन्नता का माहौल है।

प्रो.सुब्रह्मण्यम ने 1 मार्च, 2023 को श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के पांचवें निदेशक का कार्यभार संभाला था। वे भोपाल परिसर से स्थानांतरित होकर यहां आए थे। इससे पहले वे लखनऊ और हिमाचल परिसरों में सेवाएं दे चुके हैं। प्रो.सुब्रह्मण्यम के निदेशक कार्यकाल में तीन वर्ष में परिसर में आशातीत विकास हुआ। इस अवधि में छात्रों की संख्या में लगभग चारगुणा वृद्धि, कर्मचारियों को आवासीय सुविधा, बिजली-पानी के संकट से मुक्ति, विभिन्न प्रजातियों के पांच सौ पौधों का रोपण, केंद्रीय पुस्तकालय का विस्तार इत्यादि उपलब्धियां उनके खाते में जाती हैं। इन्हीं के कार्यकाल में इस वर्ष परिसर में कक्षा-6 से 12 तक के छात्रों के लिए बाल गुरुकुल का शुभारंभ भी हुआ। लगभग 40 छात्रों ने नेट और जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की तथा करीब 50 छात्रों का विभिन्न स्थानों पर प्लेसमेंट हुआ है। उनके ही कार्यकाल में यहां अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, उत्तर क्षेत्रीय युवा महोत्सव तथा प्रधानमंत्री द्वारा परिसर का उद्घाटन ऑनलाइन मोड से कराया गया। रोटरी जैसी विभिन्न संस्थाओं से संपर्क कर आर्थिक रूप से कमजोर 12 छात्रों को आर्थिक सहायता भी दिलाई गई। परिसर में छह चिकित्सा शिविर और दो रक्तदान शिविर आयोजित किए गये।

माना जा रहा है कि ऐसी अनेक उपलब्धियों और सफलताओं को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो.सुब्रह्मण्यम के कार्यकाल को तीन साल के लिए विस्तार दिया गया है। यह परिसर में पहली बार हुआ है। 16 जून,2016 को आरंभ हुए विश्वविद्यालय के इस तेरहवें परिसर में अब तक प्रो.केबी सुब्बरायुडु (प्राचार्य),प्रो.बनमाली बिश्वाल,प्रो.विजयपाल शास्त्री और प्रो.एम.चंद्रशेखर निदेशक रह चुके हैं।

प्रो.सुब्रह्मण्यम को एक और कार्यकाल मिलने से परिसर के छात्रों और कर्मचारियों में प्रसन्नता की लहर है।

निदेशक प्रो.सुब्रह्मण्यम ने तीन वर्षों में परिसर के बेहतरीन वातावरण के निर्माण और विकास में सहयोग के लिए कर्मचारियों और अध्यापकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आगे भी ऐसी अपेक्षा की है। उनका कहना है कि परिसर का विकास, अनुशासन और श्रेष्ठ अध्ययन-अध्यापन का वातावरण निर्मित करना उनका परम ध्येय है। मेरे कार्य विस्तार संबंधी विश्वविद्यालय के निर्णय का हार्दिक स्वागत करते हुए मैं कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी जी का आभार व्यक्त करता हूं।

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