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महान रचनाकार और राजनीतिज्ञ थे डॉ0 भक्तदर्शन

महान रचनाकार और राजनीतिज्ञ थे डॉ0 भक्तदर्शन

देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर की ओर से हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के प्रसिद्ध रचनकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ0 भक्तदर्शन पर आयोजित सेमिनार में वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र उनियाल ने कहा कि डॉ0 भक्तदर्शन साधारण परिवार की असाधारण प्रतिभा थे। सिद्धांतों के पक्के भक्तदर्शन ने अधिक उम्र के कारण राजनीति से संन्यास ले लिया था। वे पवित्र सोच वाले राजनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता, संवेदनशील रचनाकार और जागरूक पत्रकार थे।

व्याख्यान में श्री उनियाल ने कहा कि डॉ0 भक्तदर्शन जैसे ईमानदार व्यक्ति राजनीति में बहुत ही कम हैं। वे आजीवन किराये के मकान में रहे। उन्होंने पहाड़ से निकलकर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पौड़ी गढ़वाल की पट्टी सांवली में भौराड़ गांव में 12 फरवरी, 1912 को उनका जन्म पिता गोपालसिंह रावत के घर हुआ था। उनका नाम राजदर्शन रखा गया, परंतु भक्तदर्शन को इस नाम से गुलामी का आभास होता था, इसलिए उन्होंने अपना नाम बदलकर भक्तदर्शन रख लिया।

श्री उनियाल ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उनका संपर्क रवींद्रनाथ टैगोर और हजारी प्रसाद द्विवेदी से हुआ। यहीं से वे आजादी के राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय हुए। पहली बाद 1930 में उन्होंने नमक आंदोलन के दौरान जेल यात्रा की। फिर कई बार वे जेल गये। उन्होंने एक पत्रकार और संपादक के रूप में भूमिका निभाकर पत्रकारिता को नये आयाम दिये। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और अनेक पुस्तकों का अनुवाद किया। 1952 में पहली बार उन्हें पौड़ी गढ़वाल सीट से सांसद चुना गया। वे लगातार चार बार यहां के सांसद रहे।

संयोजक डॉ.0 वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने बताया कि परिसर में हिंदी पखवाड़ा के माध्यम से उत्तराखंड के प्रसिद्ध दिवंगत रचनाकार को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस बार हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम डॉ. भक्तदर्शन पर केंद्रित है।

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