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अध्यापकों और बच्चों ने एक साथ किया काव्य पाठ, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में युवा कवि सम्मेलन

अध्यापकों और बच्चों ने एक साथ किया काव्य पाठ, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में युवा कवि सम्मेलन

देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर की ओर सेपखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित युवा कवि सम्मेलन में परिसर के छात्रों समेत अध्यापकों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। इनमें से एक विद्यार्थी का चयन ’दस्तक नई पीढ़ी की’ कार्यक्रम के लिए किया जाएगा। इसमें रचनाकार को काव्य पाठ के लिए भुगतान किया जाएगा।

परिसर में डॉ0 भक्तदर्शन पर आयोजित व्याख्यान के बाद कवि सम्मेलन का आरंभ हुआ। वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र उनियाल की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में मोहित थपलियाल ने ’कृष्ण-अर्जुन संवाद’ विशाल भारद्वाज ने ’मैं प्रयास कर रहा हूं’ शीर्षकों वाली रचनाएं सुनाईं। मोहित सिंह ने आपदाओं पर चिंता जताते हुए ’पहाड़ ऐसे टूट रहे हैं’ शीर्षक की कविता सुनाई। ज्योति शर्मा ने नारी पर केंद्रित रचना सुनाते हुए जीवन की सत्यता को भी रेखांकित किया। हिमांशु सती ने पुरुष और स्त्री के बीच भेदभाव पर प्रश्न खड़े करते हुए गांव की ओर लौटने की प्रेरणा अपनी कविताओं मंे दी। अजय भट्ट ने ’आदमी बता नहीं पाता है’ नामक कविता में अभिव्यक्ति के लिए शब्दों का महत्त्व बताया, जबकि जतिन जोशी ने स्त्री के महत्त्व पर रचना सुनाई। धु्रव वशिष्ठ ने आसक्ति के नुकसान को रेखांकित किया तो नीरज असनोड़ा ने भारत में संस्कृत भाषामय वातातरण की संकल्पना की।

पार्थ पाराशर ने दशभक्ति आधारित जोशीली कविता सुनाई तो सचिन ने ’ये खामोशी’ शीर्षक से कविता पढ़ी। पवन ने शृंगार आधारित कविता ’लिखा हृदय का प्रेम प्रिये’ सुनाई। संदेश भट्ट ने अपने संघर्ष को कविता के माध्यम से व्यक्त किया तो आकांक्षा ने भ्रष्टाचार पर तंज कसे। सौरभ डंगलवा ने भी रचना सुनाई। शोबिता ने ’मैं गंगा हूं’ शीर्षक की कविता में गंगा के सांस्कृतिक महत्त्व और प्रदूषण के कारण होती उसकी दयनीय दशा पर कविता पढ़ी।

डॉ0 वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने ’हर किसी को कविता सुनानी चाहिए’ शीर्षक की कविता में कविता के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने पलायन के दर्द और आधुनिकता पर व्यंग्य करती कविता में पहाड़ के अतीत और वर्तमान की दयनीय दशा को उकेरा। वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र उनियाल ने मां पर आधारित कविता सुनाई-ठीक हो जाऊंगी दवाई से बोलती है, मां झूठ भी कितनी सफाई से बोलती है। उन्होंने शृंगार आधारित रचना सुनाई-कहानी एक प्यारी चल रही थी, उसकी और हमारी चल रही थी, अलार्म ने उड़ा दी, वरना शादी की तैयारी चल रही थी।

युवा कवि सम्मेलन का संयोजकत्व और संचालन करते हुए डॉ0 सोमेश बहुगुणा ने सुनाया-मन तुम्हें गर सौंप भी दूँ, तो कभी क्या तुम हृदय आधार को स्वीकार लोगी?

इस अवसर भारी संख्या में छात्र और अध्यापक उपस्थित थे।

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