आज से पहले भी मुट्ठी में थी दुनिया, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ परिसर, देवप्रयाग में ज्योतिष कार्यशाला
आज से पहले भी मुट्ठी में थी दुनिया, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ परिसर, देवप्रयाग में ज्योतिष कार्यशाला
देवप्रयाग_ केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में एक सप्ताह तक ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न आयामों का गहनता के साथ अध्यापन किया जाएगा। ‘सूर्यसिद्धांत’ नामक सात दिवसीय कार्यशाला में काल उससे जुड़ी विभिन्न अवधारणाओं और सिद्धांतों का गहन विश्लेषण होगा। कार्यक्रम का उद्घाटन परिसर निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने किया। इस कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से आए शोधार्थी और विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।

शुभारंभ अवसर पर निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि सूचना तकनीक के विकास के इस दौर में भले ही कहा जाता है कि पूरी दुनिया हमारी मुट्ठी में है, परंतु सच यह है कि आज दुनिया केवल आभासी रूप में ही मुट्ठी में है, जबकि आज से सदियों पहले ही दुनिया मुट्ठी में थी। ऐसा न होता तो वराहमिहिर के गणितीय सिद्धांत कैसे सारी दुनिया में पहुंच गये थे। भारतीय दर्शन में कैसे यवनों का उल्लेख हो पाया है। आज कुछ लोग वेदों को अपौरुषेय मानने पर सहमत नहीं हैं, परंतु उनके पास इस बात का उत्तर नहीं है कि वेदों की भाषा आज के मनुष्य को पूरी तरह समझ में क्यों नहीं आती है।

प्रो.सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आज विज्ञान ने भले ही कथित तौर पर बहुत विकास कर लिया है, परंतु भारतीय प्राचीन ज्ञान की अनेक गुत्थियों और रहस्यों को सुलझाना आज भी विज्ञान के लिए चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष काल आधारित शास्त्र है। बहुत लोगों को पता नहीं कि काल निर्विकार है। हम प्रकाश की गति से भी तेज जाएं तो अपने अतीत के जीवन और भविष्य में पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिष हमारे ऋषियों के संचित ज्ञान की अमूल्य निधि है। इसका उपयोग हमें राष्ट्र और मानव कल्याण में करना होगा। हमें ‘मेरे बस का नहीं ‘ की सोच को छोड़ ‘अहम ब्रह्मास्मि’ की भावना को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिदिन चार सत्रों में कम से कम छह घंटे चलेगी। सूर्यसिद्धांत में 500 श्लोक,11 अधिकार और तीन अध्याय हैं। किसी भी श्लोक के छूटने से अपूर्णता हो जाएगी। श्लोकों को पूरा पढ़ने के बाद इनकी व्याख्याओं में जाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि ज्योतिष के क्षेत्र में सूर्यसिद्धांत आज बहुत प्रासंगिक एवं उपयोगी है। उन्होंने कहा कि समय को वरीयता देते हुए कार्यशाला को सभी औपचारिकताओं से मुक्त रखा गया है। कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों के 40 से अधिक शोधार्थियों के अतिरिक्त परिसर के ज्योतिष विषय के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर ज्योतिष विद्या शाखा के प्राध्यापक डॉ सुरेश शर्मा,रजत गौतम छेत्री,करुण कुमार,साहिल शर्मा आदि उपस्थित थे।
