जन-सामान्य तक पहुंचाया जाए योग, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में कार्यशाला
जन-सामान्य तक पहुंचाया जाए योग, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में कार्यशाला
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय -श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला में योग का लाभ जन-सामान्य तक पहुंचाने के सूत्रों पर मंथन किया गया। योग विशेषज्ञों ने कहा कि योग का महत्त्व दिनों-दिन इसलिए बढ़ रहा है कि रोग व्यापकता के साथ बढ़ रहे हैं। उनमें जटिलता और नवीनता है। एलोपैथी इन रोगों को एक सीमा तक ठीक कर सकती है। इसलिए एलोपैथी के साथ योग का समन्वय आवश्यक है।

‘सतत चिकित्सा शिक्षा’ नामक इस कार्यशाला के समापन अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए योग अध्यापकों और विशेषज्ञों ने कहा कि योग को आधुनिक ढांचे में ढालना आवश्यक है। इसे समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाना होगा।
समापन समारोह में योग विज्ञान क्षेत्र के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित योगाचार्य प्रो. के. कृष्ण शर्मा (पूर्व चेयरमैन, ह्यूमन कॉन्शियसनेस डिपार्टमेंट, मंगलौर विश्वविद्यालय) ने बतौर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अहम हिस्से योग को चिकित्सा क्षेत्र की मुख्य धारा में लाया जाए। उन्होंने योग शिक्षा और योग विद्या के प्रचार-प्रसार शिक्षकों की भूमिका, योग के शास्त्रीय एवं आधुनिक दृष्टिकोण तथा इसके समाज पर प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
अध्यक्षता करते हुए परिसर के निदेशक प्रो. पी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि योग विद्या का लाभ वृत्ति और लोक कल्याण दोनों के लिए हो। लोगों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए योग का खासा महत्त्व है।
कार्यक्रम में सहायक निदेशिका प्रो. चंद्रकला आर. कोंडी, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, दिल्ली से प्रो. एस. लक्ष्मी कंधन, परिसर के योग विद्या शाखा संयोजक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. धनेश पी.वी.भी उपस्थित रहे। सहसंयोजक डॉ सुधांशु वर्मा ने सात दिवसीय कार्यशाला की आख्या प्रस्तुत की।
समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और इस सात दिवसीय ज्ञान संगम से प्राप्त योग, अध्यात्म एवं चिकित्सा शिक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को समाज तक पहुँचाने का आग्रह किया गया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. सुधांशु वर्मा, विभागीय प्राध्यापक डॉ. रश्मिता एवं डॉ. सुमन रावत ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा सभी प्रतिभागियों एवं परिसरीय छात्रों को धन्यवाद प्रेषित किया।
यह कार्यशाला भारत के 10 विश्वविद्यालयों एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के 12 परिसरों से आए प्रोफेसरों के लिए एक अनूठा अनुभव रही, जिसमें योग एवं चिकित्सा के क्षेत्र में नई शिक्षण विधियों और आधुनिक शोधों पर व्यापक चर्चा हुई।
