महिला समानता के नाम पर नारीवादी सोच घातक,श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में महिला दिवस कार्यक्रम का समापन
महिला समानता के नाम पर नारीवादी सोच घातक,श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में महिला दिवस कार्यक्रम का समापन
देवप्रयाग। महिला दिवस कार्यक्रम के समापन समारोह में प्राचीन से लेकर वर्तमान तक भारत में महिलाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। वक्ताओं ने कहा कि भारत में पहले से ही नारी की स्थिति पूजनीय रही। आततायियों के शोषण से नारी को बचाने के लिए यहां सती प्रथा और बालविवाह जैसी कुरीतियां पनपीं।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में महिला दिवस कार्यक्रम का आरंभ 8 फरवरी को महिला दिवस पर हुआ था। उस दिन मुख्य अतिथि पर्वतारोही और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ब्रांड एम्बेसडर पद्म श्री संतोष यादव थीं। बुधवार को समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रभारी चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिंडोलाखाल डॉ रक्षा रतूड़ी ने कहा कि भारत में महिला-पुरुष समानता के नाम पर नारीवादी सोच समाज के लिए घातक है। सच यह है कि स्त्री और पुरुष दोनों एक सिक्के को दो पहलू हैं, दोनों इस सृष्टि और समाज के लिए बराबर महत्त्वपूर्ण हैं। महिला सशक्तिकरण सही मायनों में महिला की आत्मनिर्भरता और सर्वांगीण विकास है। डॉ राधा ने कहा कि आज समाज में तलाक की घटनाओं का बढ़ना चिंताजनक है। तलाक महिला-पुरुष के सुकून को ही नहीं छीनता,उनके बच्चों के जीवन को भी नारकीय बनाता है। इस पर जागरूकता की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए परिसर निदेशक प्रो पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि जिस दिन समाज में पूर्ण रूप से महिला-पुरुष समानता हो जाएगी,उस दिन सब कुछ समाप्त हो जाएगा, क्योंकि ऐसा हो ही नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि हर कार्य में स्त्री की भूमिका प्रमुख थी, है ओर रहेगी। हम प्रकृति के विरुद्ध कभी नहीं जा सकते। हमें अधिकार चाहिए तो कर्तव्य भी निभाने होंगे।
इस अवसर पर हिन्दी प्राध्यापक डॉ वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल ने पलायन पर गढ़वाली कविता सुनाई। व्याकरण प्राध्यापक डॉ श्रीओम शर्मा ने सनातनी मूल्यों की रक्षा का आह्वान किया। छात्रा ममता सुयाल, गीतांजलि पंत, अभिषेक पाठक, अभिषेक गौड़ आदि ने नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा देती रचानाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर परिसर की ‘उत्तमा’ पत्रिका का विमोचन किया गया। पत्रिका के संबंध में सहनिदेशिका प्रो.चंद्रकला आर.कोंडी ने जानकारी प्रस्तुत की।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजिका प्रो.चौद्रकला आर कोंडी,डॉ शैलेन्द्र नारायण कोटियाल, डॉ सुशील प्रसाद बडोनी, अंकुर वत्स, डॉ जनार्दन सुवेदी, डॉ सुमिति सैनी, डॉ सुमन रावत, डॉ रश्मिता , डॉ अनिल कुमार, डॉ अमंद मिश्र, डॉ दीपक कोठारी, डॉ दीपक पालीवाल,रजत गौतम छेत्री, डॉ रवींद्र उनियाल, डॉ अरविन्द सिंह गौर, पंकज कोटियाल,किशोरी राधे , डॉ ब्रह्मानंद मिश्र आदि उपस्थित थे।
